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अपने जैसी कोई तस्वीर बनानी थी मुझे मिरे अंदर से सभी रंग तुम्हारे निकले

ऐ जुनूँ फिर मिरे सर पर वही शामत आई फिर फँसा ज़ुल्फ़ों में दिल फिर वही आफ़त आई

अगर तलाश करूँ कोई मिल ही जाएगा मगर तुम्हारी तरह कौन मुझ को चाहेगा

अभी आए अभी जाते हो जल्दी क्या है दम ले लो न छोड़ूँगा मैं जैसी चाहे तुम मुझ से क़सम ले लो

आते आते मिरा नाम सा रह गया उस के होंटों पे कुछ काँपता रह गया

आप पहलू में जो बैठें तो सँभल कर बैठें दिल-ए-बेताब को आदत है मचल जाने की जलील मानिकपूरी

आख़री हिचकी तिरे ज़ानूँ पे आए मौत भी मैं शाइराना चाहता हूँ क़तील शिफ़ाई